विचार तीन प्रकार के

प्रश्नकर्ता: सर, आपने कहा कि समझ आ जाए, तो जीवन में सोचने-विचारने की आवश्यकता कम हो जाती है। पर क्या समझ विकसित करने के लिए सोचने-विचारने की आवश्यकता नहीं है? क्या सोचने-विचारने का जीवन में महत्व है?

आचार्य प्रशांत: सोचने का जीवन में महत्व है, पर यह महत्व तभी तक है, जब वह अपने आप को ख़त्म कर दे।

देखो मन की गतिविधियाँ तीन स्तरों पर होती हैं। सबसे निचला जो स्तर होता है, उसको कहते हैं, सोचने की असमर्थता…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org