अभिभावकों से स्वस्थ सम्बन्ध

‘उम्र’ और ‘अनुभव’ दोनों ही बिलकुल व्यर्थ बातें हैं। एक बात बताओ मुझे कि तुम पचास साल तक सोते रहो तो उससे तुम में बड़ा ज्ञान उठ जाएगा? समय तो बीता, पचास साल तो बीते, पर तुमने देखा क्या है? तुम तो सोते ही रह गए! तुम्हारी आँखें तो बंद ही रहीं, तुम मान्यताओं में ही घिरे रहे।

उम्र के बढ़ने से क्या हो जाता है? जानते हो दुनिया के आम आदमी की औसत मानसिक उम्र कितनी है?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org