6 hours ago

पूरे जीवन में प्रतिपल

और क्या हो रहा है?

सुलग ही तो रहे हो!

धुआँ-धुआँ हो तुम,

इस खातिर नहीं जन्मे थे,

ये आवश्यक नहीं था!

तुम्हें जन्म इसलिए नहीं मिला था कि

तुम इतनी सड़ी-गली तरह से

इसको बिता दो।

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2 days ago

मैंने बड़े आध्यत्मिक लोग देखें हैं

जो बाहर-बाहर से कुछ और जीते हैं

और भीतर कुछ और है।

उनको शायद यही लगता होगा कि

ग्रंथों ने यही तो सिखाया है —

अभिनय करना।

और बहुत गुरु हुए हैं

जिन्होंने भी यही बात कही है।

उन्होंने कहा है,

“जीवन ऐसे जियो

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2 days ago

मेरे यहाँ कोई बात नहीं

यहाँ तो खरे-खरे सवाल हैं।

दिन भर जो करते हो

उसमें डर कितना शामिल है?

प्रेम है अपने काम से?

जिनके साथ रहते हो उनसे रिश्ते कैसे हैं?

विपरीत लिंगी को देखते हो

तो मन में क्या ज्वार-भाटा उठता है?

धन के प्रति क्या रवैया…

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Jul 30

तुम तैराक हो और जीवन एक प्रवाह, एक नदी है।

यदि तैरना आता है तो ये पानी पार निकलने में तुम्हारी सहायता करेगा।

तैरकर इसे पार कर जाओगे, दूसरे तट पर पहुँच जाओगे।

और तैरना नहीं आता तो इसी पानी, प्रवाह, नदी में डूब जाओगे।

जीवन न अच्छा है, न…

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Jul 27

जब आपके पास

जीने के लिए कोई

ऊँची वजह नहीं होती,

तब आप किसी और व्यक्ति पर

आश्रित हो जाते है।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org