हर प्रकार के अपराध की

एक ही जड़ होती है –

सत्य का अभाव,

अध्यात्म का अभाव।

जहाँ अध्यात्म नहीं है

जहाँ ग्रंथ और गुरु नहीं हैं

वहाँ मन की…

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एक उम्मीद अगर तुम छोड़ दो तो जीवन सरल हो जाएगा।

उम्मीद ये है तुम्हारी कि किसी तरह से तुम जैसे हो वैसे ही बने रहो और फिर भी तुम्हें…

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रोज़मर्रा के कामों में

जब तुम भ्रष्टाचार करते हो

बदनीयती करते हो तो

तुम देख नहीं पाते कि

तुमने कितने लोगों का

नुक़सान कर दिया।

जिसको खबर होगी कि

क्या…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org