ज़िम्मेदारी का भ्रम

ज़िम्मेदारी का अर्थ होता है, उचित समय पर उचित काम कर पाने की क्षमता। और क्योंकि समय लगातार बदलता है, लगातार नया होता है इसीलिए जो उचित काम है, वो भी लगातार नया ही होता है।

ठीक इस समय तुम्हें जो करना चाहिए वही तुम्हारी ज़िम्मेदारी है, और कुछ नहीं है तुम्हारी ज़िम्मेदारी और वो ज़िम्मेदारी कोई और तुम्हें नहीं समझा सकता। वो पूर्वनिर्धारित नहीं हो सकती।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org