हिन्दू धर्म में जातिवाद का ज़िम्मेवार कौन?

का जाति:।
जातिरिति च।
न चर्मणो न रक्तस्य न मांसस्य न चास्तिनः।
न जातिरात्मनो जातिवर्णाधरप्रकल्पिता।।

अनुवाद: शरीर (त्वचा, रक्त, हड्डी आदि) की कोई जाति नहीं होती। आत्मा की भी कोई जाति नहीं होती। जाति तो व्यवहार में प्रयुक्त कल्पना मात्र है।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org