हम लाख छुपाएँ प्यार मगर

आचार्य प्रशांत: उपनिषदों के जो उच्चत्तम श्लोक हैं वो कहते हैं कि वो अमृत से भी परे है। वो तो भूल में हैं ही जो कहते हैं कि साकार है, वो भी भ्रम में हैं जो कहते हैं निराकार है। वही उपनिषद् फिर ये भी कहते हैं कि द्वैत में जीने वाले तो पगले हैं ही, जो अद्वैत को पड़के हुए हैं वो भी गलतफहमी में हैं।

दो ही शब्द हैं जीवन में भी याद रखने लायक: भिन्न और परे। और इन दोनों में भी अगर एक को याद रखना हो तो परे। बियॉन्ड (परे) बियॉन्ड

--

--

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org