हम तीन हैं

हम तीन हैं। एक सच्चा, एक झूठा, और एक वो जो सच-झूठ में चुनाव करता है। सच्चा आवाज़ देता है, और झूठा भी।

मेरी सारी शिक्षा इतनी ही है कि तुम सच्चे की सुनना।

झूठे की आवाज़ घोटने की कोशिश मत करना। झूठा बोलता रहेगा। जब तक जिस्म है, तब तक संस्कार और वृत्तियाँ बोलेंगे ही। भय-लोभ शोर मचाएँगे ही। बस तुम उनके पक्ष में मत खड़े होना।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org