हम ज़िंदा हैं क्या?

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम, आपका एक वीडियो देखा जिसमें आप बता रहे थे कि शरीर की औकात राख भर की है। ये तो हमें भी पता है कि एक दिन मरना है। पर मौत के डर से क्या जीवन का आनंद लेना छोड़ दिया जाए?

आचार्य प्रशांत: अरे नहीं, क्या गज़ब कह दिया! तुम लो न आनंद। तुम्हारी शक्ल पर पुता हुआ है आनंद। तुम लेते चलो। कह रहे हैं, "आचार्य जी ये तो हम भी जानते हैं कि एक दिन मर जाना है। आप बार-बार मौत काहे याद दिलाते हो? कोई वीडियो आता है, 'ये…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org