हम ऐसे ही तो होते हैं!

हम ऐसे ही तो होते हैं!

हम कहाँ मानते हैं कि हालत खराब है हमारी?

अध्यात्म की तो शुरुआत ही

उस दिन से होती है,

जिस दिन तुम चैतन्य रूप से

ये स्वीकार कर लो कि तुम्हारी हालत खस्ता है।

पर अगर मान लिया कि हालत खस्ता है हमारी,

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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