हमारी मर्ज़ी, हमारी पसंद — यही हमारे भगवान

अहंकार दो दिशाओं में बढ़ता है। एक दिशा होती है उसकी पसंद की और एक दिशा होती है उसकी मुक्ति की। और दोनों ही दिशा में वो बढ़ने में आतुर रहता है।

एक होती है अहंकार की मुक्ति और एक होती है अहंकार से मुक्ति।

ज़िन्दगी में तुम्हें दो तरह के लोग आकर्षित करेंगे, दो के अलावा तीसरा कोई हो ही नहीं सकता। एक वो जो तुम्हारे अहंकार को बहुत बढ़ाते हों, तुम्हारी जैसी वृतियाँ हैं, जैसे…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org