हमारा जीवन मात्र वृत्तियों की अभिव्यक्ति

बंदि खलासी भाणै होइ ॥ होरु आखि न सकै कोइ ॥ — नानक

वक्ता: उसकी अपनी कोई इच्छा होती नहीं। परमात्मा की अपनी कोई इच्छा नहीं है। इच्छा का अर्थ ही होता है- ‘अपूर्णता’। इच्छा का अर्थ ही होता है- ‘लक्ष्य’ और ‘खालीपन’। परमात्मा कोई इच्छा कर सकता ही नहीं। जो पूर्ण है वो अब आगे क्या इच्छा करेगा?

तो हम यह फिर क्या बोलते रहते हैं बार-बार, ‘जैसी प्रभु की इच्छा’, ‘जैसी ईश्वर की…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org