स्त्री और शक्ति || आचार्य प्रशांत

प्रश्नकर्ता (प्र): इस घाट पर, आचार्य जी, ये तीन मूर्तियाँ हैं और इनको देखकर एक जिज्ञासा उठ रही है: जो देवी की मूर्ति है यह इतनी बड़ी है और जब हम ऋषि की मूर्ति देखते हैं तो वह उनके सामने बड़ी छोटी मालूम होती है। देवी, ऋषि से बड़ी हैं यह बात तो फिर भी एक बार को चलिए समझ में आ जाती है, अब जब इधर मुड़ेंगे तो देखेंगे कि देवी शिवजी की मूर्ति से भी तीन गुना बड़ी है। शिवजी तो देव-आदिदेव, महादेव हैं, उनका कद तो सबसे ऊँचा है। देवी कैसे शिव से…

--

--

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org