सोचो जब अहंकार झूठ-मूठ का इतना मज़ा दे देता है, तो सोचो वो कितना मज़ा देगा जिसकी हल्की-सी छाया-भर है अहंकार,

वहाँ कितना आनंद होगा?

जब अभी एक झूठी ताक़त का ग़ुमान तुम्हें मस्त कर देता है, तो असली ताक़त कैसी होगी?

झूठी छोड़ दो, असली उपलब्ध हो जाएगी।

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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