सेवा से पहले स्वयं

प्रश्नकर्ता: सर, बचपन से सुनते आये हैं ‘स्वयं से पहले, सेवा’। पर यहाँ आकर सुना कि ‘सेवा से पहले, स्वयं’। तो सर ये…

आचार्य प्रशांत: तो फँस गये!

बात ठीक है। भ्रम पैदा होना लाज़मी है। सेवा करेगा कौन? अब छ: लोग तुम्हारे आसपास सोये हुए हैं और तुम भी सोये हुए हो और तुम उनकी सेवा करना चाहते हो। कर सकते हो ? दूसरों की मदद कर लो। पर दूसरों को जगा सको इसके लिए क्या ज़रुरी है …?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org