सेंस ऑफ ह्यूमर

प्रश्नकर्ता: सर मैं बंगाल से हूँ। बचपन से ही धीर-गंभीर मिजाज़ का रहा हूँ। अब मैं दिल्ली पढ़ने आया हूँ। यहाँ देख रहा हूँ कि सेंस ऑफ़ ह्यूमर (हास्यवृत्ति) को बहुत महत्व दिया जाता है। सेंस ऑफ ह्यूमर नहीं है तो आपके यार दोस्त आपको पसंद नहीं करते हैं। कई लोगों को तो मैंने कहते हुए सुना है कि सफ़ल होने के लिए भी सेंस ऑफ ह्यूमर ज़रूरी है। सर ये सेंस ऑफ ह्यूमर कैसे विकसित करूँ?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org