सुन्दर लड़की के सामने छवि बनाने की कोशिश

मान लो, कोई चार गाली सुनाए, उससे तुम्हारा स्वार्थ बहुत है और वो चार गाली सुनाए तो तुम कहते हो कि “नहीं, अब हमारा ज़मीर जाग गया है, कुछ नहीं चाहिए तुझसे, चला जा यहाँ से”, क्योंकि उसने चार गाली सुनाई हैं। तो साधना ये है कि अगली बार जब तीन सुनाए तभी कह देना, “तू जा!” उसके अगली बार दो में ही कह देना कि, “नहीं, जा!” उसके अगली बार एक में और उसके अगली बार उस व्यक्ति और उस जैसे व्यक्तियों के आसपास नज़र ही मत आओ। ले देकर बात इतनी…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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