सुधरेगी तो पूरी ज़िन्दगी या फिर कुछ नहीं

आचार्य प्रशांत: पूरा जीवन अगर सुचारु नहीं है तो वो — ग्रंथ भी यही कहते हैं, मेरा भी अनुभव यही रहा है — की फिर बड़ा मुश्किल हो जाएगा आचरण पर नियंत्रण कर पाना। आहार-विहार तो आचरण की ही बात है ना — क्या खाया? क्या पिया? पूरी दिनचर्या, सारे सम्बन्ध, अखबार में क्या पढ़ रहे हैं, टीवी में क्या दिख रहा है, इंटरनेट पर क्या रुचि है और आचरण कैसा है, आहार-विहार कैसा है यह सब आपस में जुड़ी बातें है। कोई एक इनमें से अकेले ठीक कर पाना…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org