सार्थक जीवन की कुंजी

ये छोड़ो कि मैं सब कुछ त्याग दूँगा,
निरुद्देश्य हो जाऊँगा, खाली हो जाऊँगा इत्यादि।

तुम तो पकड़ो! तुम एक महत उद्देश्य पकड़ो
और जीवन उसको दे दो।

यही भक्ति है, यही कर्मयोग है।
इसी में जीवन का रस है, सार्थकता है।

तुम्हारे पास अगर वो महत उद्देश्य नहीं है
तो बड़ा गरीब है तुम्हारा जीवन।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org