सारी बेचैनी किसलिए?

‘जो होगा अपने आप होगा, हम कुछ नहीं कर सकते’, ये भी कर्ताभाव ही पकड़ लिया आप ने। वो बात बहुत सूक्ष्म है। इतनी नहीं है कि ‘जो होगा अपने आप हो जायेगा, हम कुछ नहीं कर सकते’ — बहुत हलकी बात है ये। वो बात ऐसी है कि करते हुए भी ‘मैं’ कर नहीं रहा। वो ये नहीं है कि हम कुछ नहीं कर सकते। वो बात ऐसी है कि करते हुए भी ‘मैं’ कर नहीं रहा। ‘मैं’ नहीं कर रहा हूँ, ये तो बात है ही नहीं। ‘न करने’ में तो ‘करना’ आ गया; अकर्ता बहुत सूक्ष्म बात है।

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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