सांसारिक लक्ष्यों के लिए अध्यात्म का उपयोग

प्रश्न: आचार्य जी, पढ़ाई-लिखाई में मन नहीं लगता है। कक्षा में जब पढ़ाई-लिखाई होती है, तो ध्यान पढ़ाई से भटकता रहता है। कक्षा छोड़कर, बाहर मैदान में खेलता ही रहता हूँ। इस कारण मेरे अंक भी कम आते हैं। ध्यान भटकता रहता है, और बहुत आलस भी रहता है। आपके वीडियोज़ लम्बे समय से देखता हूँ, जिनसे थोड़ा परिवर्तन आया है। लेकिन पढ़ाई में मन अभी भी नहीं लगता है। आपके सामने बैठता हूँ तो अच्छा लगता है, मन को शांति मिलती है।

यहाँ आश्रम आने के लिये जो संसाधन लगते हैं, वो परिवारवालों से माँगने पर सहयोग नहीं मिल रहा है। ऐसी परिस्थिति में क्या करूँ?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org