सही चुनाव का समार्थ्य

सही चुनाव का समार्थ्य

आचार्य प्रशांत: बताइए, क्या प्रश्न हैं? प्रश्न भी कुछ जन्माष्टमी विशेष जैसे ही होने चाहिए। ये न हो कि अभी बातचीत हुई और प्रश्न स्थूल कोटि के आ गए।

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी।

आचार्य: खीर वगैरह बनी कि नहीं बनी?

प्र: नहीं, आचार्य जी। खीर नहीं बनी है।

आचार्य: तो अभी बनेगी न रात तक?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org