सही काम करने की नीयत माँगो, तरीका नहीं

तरीके के माँग करना एक आंतरिक चालाकी है बदलने के खिलाफ। जब दुख व्यक्ति का चुनाव है तो तरीके की माँग भी फिर क्या हुई? आप चुन रहे है न कि आप स्वयं नहीं करेंगे, आप किसी और से जाकर के माँग करेंगे।

इसी तरीके से जब दूसरा बिंदु है सार्थक कर्म का, तो सार्थक कर्म आपको ही करना है न और सार्थक कर्म आपको निरंतर करना है जैसे चुनाव निरंतर है। लगातार क्या आप किसी से विधि पूछेंगे कि कैसे चुनू और कैसे सार्थक कर्म…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org