समाधान से पहले सवाल रुकने नहीं चाहिए

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, गुरु जी। आज जब हू ऍम आई? (मैं कौन हूँ?) पढ़ रहे था तो मन में आया - हम लोग बैठकर चर्चा कर रहे थे कि सवाल पूछने चाहिए तो जाकर कुछ मिलेगा। अंत में जो रह जाता है वो मैं हूँ - तो ये सवाल-जवाब करते-करते मैंने देखा सबके साथ कि बहुत उलझा हुआ हूँ मैं और उलझा ही रह जाऊँगा इस तरह से। तो कैसे मैं पहुँच जाऊँगा? ऐसे तो मैं जितने सवाल करूँगा, सवाल होते जाएँगे, सवाल होते जाएँगे और उलझते ही जाऊँगा।

आचार्य प्रशांत: तुम्हें कैसे पता कि सवाल करोगे तो सवाल होते ही जाएगा, होते ही जाएगा? तुमने कितने करे हैं आजतक? आजतक करे कितने हैं? ज़िन्दगी में कुल मिलकर पौने-तीन सवाल…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org