समाज में ताक़त और इज़्ज़त की चाहत

प्रश्नकर्ता: जिस समाज में मैं प्रतिदिन जी रहा हूँ, उसमें ताक़त और प्रतिष्ठा ही सब कुछ है। जिसकी हैसियत और उपाधि ना हो उसे कोई सुनता भी नहीं और जो समाज में ऊँचे स्थान पर बैठा है, वो कुछ अनर्गल ही क्यों न बके वो परम-सत्य मान लिया जाता है। मैंने कुछ ख़ास नहीं पाया जीवन में, क्या इस नीति अनुसार मैं सदा दबा-दबा ही जिऊँगा?

आचार्य प्रशांत: कई बातें हैं आपसे पूछना चाहूँगा इसमें। किनसे दबा-दबा? कह रहे हैं कि दुनिया में यही देखा है कि जिनके पास ताक़त है, सत्ता है, प्रतिष्ठा है वो कितनी भी व्यर्थ, अनर्गल बकवास ही क्यों न करें, लोग सुनते हैं। और जिनके पास नहीं है ताक़त, उनकी कोई नहीं…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org