समय प्रबंधन की समस्या

जब आप कहते हैं कि आपका समय व्यर्थ ही कहीं ज़ाया हो जाता है, तो उससे शायद आपका आशय ये है कि आप चाहते कुछ और हैं, हो कुछ और जाता है। आप चाह रहे हैं समय लगाएँ इस दिशा में और समय लग जाता है उस दिशा में। हमारा मन हमारी चाहत से कहीं ज़्यादा गहरा होता है। जिसको आप कहते हैं अपनी इच्छा, वो बड़ी सतह-सतह की बात होती है, इच्छाओं के नीचे इच्छा होती है। जो चैतन्य मन होता है, वो बस मन की ऊपरी तह है, उसके नीचे मन का बड़ा सागर बैठा हुआ है, बड़ी गहराइयाँ है वहाँ, और उन…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org