सब महापुरुष कभी तुम्हारी तरह साधारण ही थे

हम बदलना नहीं चाहते, इसके लिए हम तरीके-तरीके के उपाय करते हैं। एक उपाय ये है कि जो कोई हमसे आगे हो, उसको घोषित कर दो — ‘महापुरुष’, और फिर बोल दो, “वो तो महापुरुष हैं, मैं तो छोटा आदमी हूँ, तो मैं उनके जैसा जीवन थोड़े ही जी सकता हूँ।”

हम एक सुविधाजनक विभाजन करते हैं: साधारण लोग और असाधारण लोग। और जो साधारण है, उसका काम है साधारण ही रह जाना। और जो असाधारण है, “उसको तो भाई दैवीय भेंट मिली हुई…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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