सत्य की फ़िक्र छोड़ो, तुम बस ग़लत को ठुकराते चलो

सत्य की फ़िक्र छोड़ो, तुम बस ग़लत को ठुकराते चलो

आचार्य प्रशांत: अर्जुन का द्वंद सामने आता है इन शब्दों में, कह रहे हैं अर्जुन –

न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयोयद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः। यानेव हत्वा न जिजीविषामस्तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः।।

हम नहीं जानते कि हमारे लिए युद्ध करना और न करना — इन दोनों में से क्या श्रेष्ठ है, हम नहीं जानते कि हम जीतेंगे या वे जीतेंगे। और जिनको मारकर हम जीना भी नहीं चाहते

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org