सत्यत्वबुद्धि, अहंबुद्धि और ममबुद्धि

पदार्थ में सत्यत्वबुद्धि का मतलब होता है कि तुमने पदार्थ को देखा और कहा ये है, मैं होऊँ न होऊँ ये है। उसका होना तुमने अपने आप में पूर्ण घटना मान ली, एक अद्वैत घटना मान ली, एक अनाश्रित घटना मान ली, जबकि पदार्थ अपने आप में सत्य नहीं है क्योंकि पदार्थ का होना आश्रित है, तुम्हारे देखने पर, तुम्हारी स्मृति पर, तुम्हारे अनुभव पर, पदार्थ का होना सत्यापित ही तुम करते हो, तुम न हो तो कौन आएगा सत्यापित करने पदार्थ को? तुम कहोगे मैं न…

--

--

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org