सच का रास्ता आसान होता नहीं,

उसमें जाना पड़ता है,

अपने ही ख़िलाफ़!

और झूठ का रास्ता

हमेशा आकर्षक लगता है,

क्योंकि प्रतीत ये होता है कि

उस पर आसानी से

सुख-सफलता वगैरह मिल जाएँगे।

तो हमारे भीतर की पुरानी,

आदिम, अँधेरी वृत्तियाँ लगातार

खिंचती रहती हैं झूठ की ओर!

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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