सच्चे प्रेम की पहचान

सच्चे प्रेम की पहचान

प्रश्नकर्ता: क्या ज़िंदगी में किसी दूसरे व्यक्ति का साथ ज़रूरी है? आज मैंने प्रेम विषय पर आपको पढ़ा। आपने बताया कि प्रेम दूसरे से चिपकने का नाम नहीं है। मन शांत हो, अकेला हो तब उसे प्रेम समझ में आता है पर मैं तो अकेले नहीं रह पाती हूँ। क्या मुझे प्रेम कभी समझ में नहीं आएगा? अतीत में मुझे प्रेम हुआ था ऐसा मुझे लगा पर आज समझ आता है कि वो सच्चा प्रेम नहीं था। आगे से कैसे परखूँ कि प्रेम सच्चा है या नहीं?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org