सच्चा प्रेम कैसा?

ये लड़के-लड़कियाँ कैमरे के सामने उछल-कूद मचा रहे हैं और कह रहे हैं, “इश्क़-इश्क़!” इन्हें इश्क़ का क्या पता? ये तो रूखे लौंडे है, क्यों भई! इश्क़ का पता तो किसी रुमी को होता है, किसी हाफिज़ को होता है, अरे बाबा-फरीद को होता है। तुम कहोगे, “पर वो तो बाबा-फरीद, सफेद दाढ़ी! बूढ़े!” वही असली इश्क़ है। ये थोड़े ही है कि फूल लेकर के एक-दूसरे के पीछे दौड़ने लग गए, झाड़ियों मे घुस गए, इलू-इलू गाने लगे, होटल में कमरा बुक करा लिया तो ये इश्क़ है; बचपना, नौटंकी, कठपुतली का…

--

--

--

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

Love podcasts or audiobooks? Learn on the go with our new app.

Get the Medium app

A button that says 'Download on the App Store', and if clicked it will lead you to the iOS App store
A button that says 'Get it on, Google Play', and if clicked it will lead you to the Google Play store
आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

More from Medium

How can we protect ourselves and loved ones from people like “The Tinder Swindler”?

Love is About the Narrative:

What I Talk About When I Talk About Kanye

Make Cents