संविधान बाहरी व्यवस्था के लिए है, आतंरिक जागृति तो धर्म से ही आएगी

दो तरह की सत्ता चलती थीं सोलहवीं शताब्दी के, सत्रहवीं शताब्दी के यूरोप में। सत्ता के दो केंद्र थे। एक था राजा, ठीक है? जिसका आदेश तुम्हें मानना ही पड़ेगा — ऑथोरिटी। और सत्ता का दूसरा केंद्र था चर्च, ठीक है? एनलाइटेनमेंट ने कहा कि मुझे सत्ता के दोनों ही केंद्र स्वीकार नहीं है, बिल्कुल नहीं चाहिए। इन दोनों को हटाओ। ये दोनों केंद्र सत्ता के बाहर के थे: राजा बताता तुम्हें कि कैसा…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org