संयम और मर्यादा किनके लिए अनिवार्य हैं?

प्रश्नकर्ता: जैसे वृत्तियाँ होती हैं। वृत्ति होती है, फिर विचार का तल आता है। तो विचारों में कई बार फिर भी होता है कि विचार मन में घूम रहे होते हैं तो आप फिर भी उसे कई बार पकड़ पाते हो कि हाँ, अच्छा ऐसा कुछ चल रहा है और आप उसे ट्रेस बैक करने की कोशिश करते हो। लेकिन बहुत बार ऐसा होता है कि वृत्ति से सीधा कर्म ही निकल जाता है। विचार भी नहीं आता, बस उस तरीके से एक्ट करने लग जाते हो। और आपको पता भी नहीं चलता कि आप बहुत ही अचेतन तरीके से व्यवहार कर रहे हो और यह बार-बार देखने में आता भी है, खुद भी मतलब ऑब्जर्वेशन होता है पूरे दिन भर। तो इसका तरीका और क्या है बचने का?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org