शिक्षा व्यवस्था से घुटन, और बदलाव

शिक्षा तंत्र तुमसे बाहर की एक चीज़ है, वो बदले या न बदले या कब बदले, वो मुद्दा प्राथमिक नहीं है। तुम्हारा जीवन है तुम्हारे बिल्कुल करीब, उसका बदलना ज़रुरी है।

महत्वाकांक्षा बहुत बड़ी बीमारी है और हमारी शिक्षा हमें महत्वकांक्षी ही बनाती है। प्रतिस्पर्धी मन बीमारी है और हमारी शिक्षा प्रतियोगिता पर ही आधारित है। डर और लालच, दोनों मन की बड़ी बीमारियाँ हैं और हमारी शिक्षा ऐसी है जो डराती भी है और लालच भी देती है।…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org