शारीरिक आकर्षण इतना प्रबल क्यों?

प्रश्न: आचार्य जी प्रणाम। आचार्य जी, आपके सत्संग में आना अच्छा तो लगता है, पर आने के लिए बड़ा प्रयत्न करता पड़ता है। दूसरी ओर जब प्रेमिका मिलने के लिए बुलाती है, तो उतना प्रयत्न नहीं करना पड़ता।

ऐसा क्यों?

आचार्य प्रशांत जी: क्योंकि मुक्ति ज़रूरी नहीं है।

देह है, इसके लिए मुक्ति ज़रूरी है ही नहीं, लड़की ज़रूरी है। तो वो लड़की की ओर जाती है। ये जो तुम्हारी देह है, ये बताओ इसके किस हिस्से को मुक्ति चाहिए? नाक को मुक्ति चाहिए? आँख को मुक्ति चाहिए? नहीं। पर तुम्हारी देह में कुछ ख़ास हिस्से हैं जिन्हें लड़की चाहिए। तो लड़की के लिए तो…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org