शांति का प्रयास ही अशांति है

आदमी जो कुछ भी करता है वो करता किसी इच्छा के वशीभूत होकर ही है और हर इच्छा आख़िर में परम की ही इच्छा है।

लेकिन आप जो कुछ भी करते हैं, उस पर तुरंत ही माया कब्ज़ा कर लेती है। आपका बड़े से बड़ा प्रयास भी अंततः जिसकी तरफ जाने के लिए होता है, उसकी तरफ जाने की बजाय, उसके विपरीत मोड़ दिया जाता है।

हम जो कुछ भी करना चाहते हैं, पाना चाहते हैं, उसका आख़िरी लक्ष्य होता है कि शांति मिल जाएगी, चिंताओं से

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org