शहर पर व्यर्थ चाँद

यहाँ विशुद्ध अंधकार भी तो नहीं है।
गौर से देखो तो मालूम पड़ता है
कि- हाँ कुछ चीज़ें हैं, यहाँ आसपास।
दिखाई बस इतना पड़ता है
कि और दिखाई देने की व्यग्रता
या इतना दिखाई पड़ जाने का अवसाद
तुम्हें लिखने पर विवश कर दे।

--

--

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

Love podcasts or audiobooks? Learn on the go with our new app.

Get the Medium app

A button that says 'Download on the App Store', and if clicked it will lead you to the iOS App store
A button that says 'Get it on, Google Play', and if clicked it will lead you to the Google Play store
आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

795 Followers

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org