शरीर का वास्तविक उपयोग

वक्ता: ऋद्धि सिद्धि माँगो नहीं, माँगो तुम पै येह।

निसि दिन दर्शन साधु को, प्रभु कबीर कहुँ देह।।

इसी के साथ कुछ अन्य पंक्तियाँ भी हैं

एह अगन बिरहों दी जारी, कोई हमरी तपन निवारी।

बिन दर्सन कैसे तरिये, हुण की करिये।।

दोनों ही उदाहरणों में दर्शन शब्द आया है। कबीर, बुल्ले शाह दोनों ने एक साझे शब्द का प्रयोग किया है, किसका?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org