व्यक्तिगत दुख भूलो समष्टिगत दुख मिटाओ

व्यक्तिगत दुख भूलो समष्टिगत दुख मिटाओ

प्रश्नकर्ता: नमस्कार, आचार्य जी। आज काफ़ी बार हमने इसके ऊपर बात करी कि काम करने के पीछे कोई वजह नहीं है, निष्कामकर्म के ऊपर बात की। तो कोई व्यक्ति बाहर से युद्ध को देख रहा होगा जब, तो देखने में तो उसको बहुत कुछ दिखेगा कि योजनाएँ बन रही हैं, लक्ष्य हैं, बीच में भाव भी उठ रहे हैं कि गुस्सा आ रहा है, रथ का पहिया उठा लिया। तो आँखों में हो सकता है कि भाव भी दिख रहे हों। तो इस सबको ये देखें कि वो बस बाहर दिखने के लिए है, अंदर से…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org