वृत्तियों का दृष्टा बनें या दमन करें?

तुम्हारा मन किसी दिशा में भाग रहा है, तुम मन की दिशा को परिवर्तन देना चाहो या उलट देना चाहो, इससे अगर तुमको लाभ होगा भी तो आंशिक होगा।

मात्र दर्शन, विशुद्ध अवलोकन, आंशिक लाभ से कहीं ज़्यादा लाभ देता है। बस उसमें थोड़ा खतरा होता है।

जब तुम एक अनचाहे विचार को, एक प्रिय विचार की तरफ पलटते हो, तो तुम्हें सुख मिलता है और सुरक्षा मिलती है। तुम्हें कोई विचार उठ रहा था, जिसको तुम…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org