विद्रोही लड़की, सुविधा और सुरक्षा की आशा छोड़ो!

अगर विद्रोह करती है कोई लड़की परिवार के विरुद्ध, समाज के विरुद्ध, बन्धनों के विरुद्ध तो सबसे पहले वह क्या खोती है? बहुत अच्छा सा घर होगा, उससे वंचित होना पड़ेगा।

पहले वो मिल जाता है पिता के अनुशासन के अधीन रह कर और अगर पिता के अनुशासन के अधीन हो तो पिता विवाह ही ऐसी जगह कर देंगे, जहाँ वही मटेरियल सुख-सुविधाएँ मिलने लगेंगी पति के अधीन रह कर। एक चमकती हुई कोठी से विदाई होकर दूसरी चमकती हुई कोठी में प्रवेश हो जाता है।

और अगर विद्रोह किया इस व्यवस्था के प्रति तो कोठियों से हाथ धोना पड़ता है, और हैं लड़कियाँ जिन्होंने विद्रोह किया, उनकी कोठियाँ छिन गई।

डर क्या छिनने का है? डर कोठी और पैसा छिनने का है, सुख-सुविधाएँ छिनने का है।

समाज स्त्रियों का शोषण तो खूब करता है, लेकिन साथ ही साथ उन्हें सजा-धजा के भी रखता है और सुख-सुविधा सम्पन भी रखता है।

स्त्री घर की लाज और इज्ज़त होती है न, तो उसे सुख-सुविधा से लेस रखा जाता है, गोरे मुखड़े पर आँच नहीं आने वाली, मन भले गन्दा कर दिया जाए।

चुनाव स्त्री को करना है। मिलेंगे तो दोनों साथ मिलेंगे -गहने और शोषण। जिन्हें कोठियों का लालच है वो शोषण करवाने के लिए तैयार रहें।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org