विद्या और अविद्या, जीत और हार

प्रश्नकर्ता: "अगर हम अविद्या जानते हैं तो अंधकार में जाते ही हैं, लेकिन साथ-साथ हम अगर विद्या भी जानते हैं तो और गहनतम अंधकार में जाते हैं।" तो ओशो भी कहते हैं कि जैसे एनलाइटमेंट जैसी कोई चीज़ होती नहीं है, और जैसे हम दिन में जब होश में रहते हैं, सही काम कर रहे हैं, वही एनलाइटमेंट है; जैसे ही कोई ग़लत काम करते हैं, फिर से पहले वाली अवस्था में आ जाते हैं।

तो साकार और निराकार और ये विद्या-अविद्या को कैसे हम देखें? थोड़ा उदाहरण से समझाइए। कैसे जानें कि विद्या, अज्ञान हो जाने पर या विद्या का ह्रास हो जाने पर हम कुछ ग़लत काम नहीं करते?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org