विदेशी कंपनियाँ और बाज़ारवाद: पतन भाषा, संस्कृति व धर्म का

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, नमस्ते।

इतिहास है कि ईस्ट इंडिया कंपनी के कारण हमने बहुत ग़ुलामी झेली। आज अनेकों विदेशी कंपनियाँ हैं बाज़ार में, क्या वो भी ग़ुलाम बना रही हैं हमें? आर्थिक पक्ष तो एक तरफ़ है, मैं आपसे समझना चाहता हूँ कि इन कंपनियों का हम पर मानसिक और सांस्कृतिक रूप से क्या असर पड़ता है?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org