वर्तमान में जीना माने क्या?

मन के लिए अभी(नाउ) जैसी कोई चीज़ होती नहीं है। शब्दों में आप भले ही कह दें: ‘वर्तमान’ लेकिन मन वर्तमान को भी अतीत और भविष्य की श्रृंखला में एक कड़ी के रूप में ही देखता है। ये जो आजकल प्रचलित मुहावरा है, लिविंग इन द मोमेंट(वर्तमान में जीना) ये बड़ा अर्थहीन है। इससे हमें ये दिलासा मिल जाता है कि जैसे हमें कुछ पता चल गया। जैसे कि हमें कोई सूत्र मिल गया हो, अच्छा जीवन जीने के लिए: ‘लिविंग इन द नाउ, लिविंग इन द प्रेसेंट।’

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org