लोग झूठे हैं, उनके साथ घुल-मिलकर कैसे रहें ?

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य ज़ी! आध्यात्मिक व्यक्ति की सामाजिक लाइफ़ (ज़िंदगी) कैसी होनी चाहिए? जीवन में मित्र और रिश्ते भी आवश्यक हैं लेकिन आध्यात्मिक लोगों की संख्या कम है, माया में लिप्त लोगों की ज़्यादा। सामाजिक पक्ष जीवन का कैसे मजबूत करें? मेरा जीवन कटा-कटा सा महसूस होता है, कहीं भी लोगों के साथ घुल-मिलकर रह नहीं पाता। घर, परिवार, सामाजिक जीवन, मानसिक स्वास्थ्य, ऑफिस (दफ्तर) का जीवन इत्यादि सबकुछ अस्त-व्यस्त सा…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org