लॉकडाउन खत्म हो, ‘नॉर्मल लाइफ़’ वापस मिले?

इसी कोशिश में हम सभी लगे हैं कि जल्दी से जल्दी सब कुछ सामान्य हो जाए। तुम्हारी सामान्य ज़िंदगी इतनी ही अच्छी थी, इतनी ही सही थी, तो ये महामारी कहाँ से आ गई? जिस ज़िंदगी से ये महामारी आई है, तुम चाहते हो कि तुम उसी तरह की ज़िंदगी में दोबारा चले जाओ, तुम सोच भी नहीं रहे अगर उसमें दोबारा जाओगे, तो दोबारा इसी या इससे भी कही ज़्यादा भयानक महामारी को पाओगे। वो किसी भी तरह की महामारी हो सकती है, ज़रूरी नहीं कि बाहरी हो, आंतरिक…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org