लिखनी है नयी कहानी?

मेरा एक साथी था, उसके माँ-बाप रात-दिन उसको बोलते रहते थे कि शादी कर ले। उसने एक दिन उनसे कहा, “तुम दोनों को देखता हूँ, उसके बाद भी तुम्हें लगता है कि मैं शादी कर सकता हूँ?” उसने ये बात मज़ाक में नहीं कही थी। उसने कहा, “परिणाम सामने है। अगर शादी का अर्थ ये है जो तुम दोनों मुझे रात-दिन दिखाते हो, और जैसा जीवन तुम दोनों ने जिया है, भले ही होंगे मेरे माँ -बाप, पर मुझे दिख तो रहा है कि कैसे हो, तो मुझे नहीं करनी शादी। कहाँ है प्रेम? निभा रहे हो, वो अलग बात…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org