लाचार नहीं हो तुम, विद्रोह करो!

आपका जन्म किसी एक प्रकार से जीवन बिताने के लिए तो हुआ नहीं है। अनंत संभावनाएँ थीं, और समय तुम्हारे पास बहुत थोड़ा। उन सब अनंत संभावनाओं को तुम जी नहीं सकते। बात ठीक है बिलकुल। लेकिन कम-से-कम उन अनंत संभावनाओं में से किसी एक संभावना से बँधकर तो मत रह जाओ। किसी एक संभावना के गुलाम बन कर तो मत रह जाओ। बीच-बीच में विद्रोह करते रहो ताकि तुम्हें याद रहे कि जीवन कैसा भी बिता सकते हो। चुनाव का हक है। विकल्प मौजूद हैं।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org