लाचार नहीं हो तुम, विद्रोह करो!

लाचार नहीं हो तुम, विद्रोह करो!

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपने आखिरी सत्र में चुनाव की बात की। चुनाव की क्षमता की बात की थी। हमने समझा है कि आमतौर पर तो हम संस्कारित हैं, बचपन से लेकर अभी तक| तो चुनाव कैसे हो पाता है सही में, जब सब कुछ ही, हमारी साँस, हमारी आँखें…

आचार्य प्रशांत: पूरी तरह नहीं हैं संस्कारित न। पूरी तरह संस्कारित होते, तो कैसे कह पाते कि संस्कारित हो? अगर पूरी तरह तुम संस्कार का एक पुतला ही होते, एक पैकेट होते, तो तुम्हें…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org